Rudraksh



Future of Bihar Government as oath taken on 20.Nov.2015







बिहार चुनाव 2015 देश ही नहीं, दुनिया के राजनीतिज्ञ-बुद्धिजीवी से लेकर आम जनता की पैनी नजर पर रहा है।श्री नीतीश कुमार को शपथग्रहण के अनुसार किये गये कमजोर मुहूर्त गणना के वाबजूद 2016 में श्री नीतीश कुमार सफल रहते हैं तो उन्हें चन्द्रगुप्त-महाबली जैसा उपाधियों से ‘समय’ अवश्य नवाजेगा, क्योंकि अभी तक करीब-करीब सभी चुनाव विश्लेषक, राजनीतिक पंडितों का चुनाव में भारी बहुमत आने का विश्लेषण खाली रहा। क्या वे ज्योतिषीय गणित को भी मात कर सकेंगे ? बिहार को विकास के साथ सुशासन की आवश्यकता विशेष है। इसके लिए श्री नीतीश कुमार जाना-परखा शख्सियत हैं जिनपर बिहार के सभी वर्गो ने विश्वास किया है। जिज्ञासु ज्योतिष प्रेमियों के अनुरोध पर मुहूर्त विज्ञान के आधार पर 20 नवम्बर, 2015 को सम्पन्न हुए बिहार सरकार का शपथग्रहण, (जो 1947 के बाद पहली बार सामाजिक न्याय/पिछड़ों की सरकार बनी है) के आधार पर गहन विश्लेषण के अनुसार ग्रहों के संयोग से होनेवाली घटनाओं को देखने का हम प्रयास करेंगे। इसे एक रोमांच एवं उत्सुकतावश देखना चाहिए। पौराणिक वैदिक मुहूर्त ज्योतिषशास्त्र का निरंतर अभ्यास बड़े-बड़े महारथिों के शपथग्रहण पर आदिकाल से किया जाता रहा है। श्री नीतीश कुमार की निज कुंडली(जो अपुष्ट है) पर मुहूर्त कुंडली कितना प्रभावकारी बनता है, ज्योतिष प्रेमियों के लिए शोध का विषय है। देश या विदेशों में भी कई राजाओं ने पीढी दर पीढी सैकड़ों वर्षो तक राजपाठ किया। किंतु कीर्ति/अध्यात्मिक/प्रतापी राजाओं में राजा विक्रमादित्य(विक्रम संवत से जाना जाता है), चाणक्य एवं चंद्रगुप्त की जोड़ी दुनिया भर में ऐतिहासिक मानी गयी है। इन लोगों की कीर्ति जबतक पृथ्वी रहेगी, याद रखी जायेगी। प्रतापी राजा के साथ सुशासन/कीर्ति/अध्यात्म का ऐसा उदाहरण विश्व में शायद नहीं है। अन्य कुछेक प्रतापी राजा भी हुए हैं। इस अनुसंधान को ज्ञानवर्द्धन के साथ-साथ मनोरंजन के लिए लेना चाहिए। पूर्व के दो सफल शपथग्रहण काल का मुहूर्त उत्तम माना गया था। 20 नवम्बर, 2015 की तिथि कमजोर मानी गयी है। चुनाव के पूर्व ये गणना दक्षिण पद्धिति अयांश पर आधारित रहेगा।
सर्वप्रथम मुहूर्त विज्ञान के अनुसार मीन लग्न एवं धनु कारकांश में बिहार में नयी सरकार का शपथग्रहण श्री नीतीश कुमार ने पांचवे वार मुख्यमंत्री के रूप में किया है। लग्नेश वृहस्पति षष्ठ में सिंह राशि-स्थिर राशि में रहने से उत्तम अवश्य है। किंतु ये एक दल एवं बहुमत वाली सरकार रहती तो अति उत्तम होता। लेकिन गठबंधन होने से आघान कुंडली में पार्टनर स्थान या साथ में सहयोग करने वाली पार्टियों के स्थान में राहु/मंगल/शुक्र रहने से आपस के संबंधों में काफी विपरीत में कटु परिस्थितियाॅं बन सकती है। साथ में राहु/मंगल का प्रभाव बिहार सराकर एवं राज्य की परिस्थितियाॅं 2016 में विशेष नुकसान वाला रह सकती है। हत्या/बलात्कार संबंधी घटनाएॅ/ अपहरण/ घोटालें/विष-नशा से संबंधित दुर्घटनाएॅ/सेक्स स्केंडल एवं पक्ष-विपक्ष के नेताओं पर मुकदमा/अपराधिक घटनाओं के साथ-साथ बड़े पैमाने पर राजनीतिज्ञ/अपराधिक लोगों के खिलाफ मुकदमों के कारण भी बिहार देश-विदेश में चर्चित रहेगा। चैनलों को काफी न्यूज बिहार से और मिलेंगे।चूंकि राहु/शुक्र की युक्ति प्रचार-प्रसार भी देगा। किसी भी घटना/उद्घाटन या फिर शपथग्रहण के समय को आधार बनाकर आघान कुंडली बनायी जाती है और जातक के तरह फलादेश दिये जाने की प्रथा है। सप्तमस्थ राहु एवं द्वितीयेश मंगल की दशा/अन्र्तदशा का प्रभाव मारक जैसा प्रभाव देता है जिससे ज्योतिषीय विधि से 2016 का वर्ष सरकार के लिए भारी रह सकता है। ऐसा नहीं है कि गठबंधन की पार्टियाॅ जानबूझ कर या स्वार्थ में विघटन की ओर जा सकती हैं, बल्कि अकस्मात घटनाएॅ या परिस्थितियाॅ विपरीत हालात पैदा करा सकती है।
पराशरीय ज्योतिषशास्त्र में सप्तम स्थान को पत्नी स्थान/पार्टनर/साझीदार/मारक स्थान माना गया है। 20 नवम्बर, 2015 को सप्तम स्थान में राहु/मंगल/शुक्र का रहना आघान कुंडली के लिए कमजोर बना दिया है, खासकर 2016 के लिए।कुछ भी अप्रत्याशित विखराव की संभवना का प्रबल योग बना दिया है। चूंकि पिछले दो शपथ ग्रहण काल में पार्टनर स्थान में एक ही ग्रह स्थित था और वह भी शुभ चंद्रमा 2005 में एवं शुक्र 2010 शपथग्रहण समय पड़ा था। पार्टनर भी एक ही था, वह भाजपा किंतु इस बार पार्टनर स्थान में तीन ग्रहों का योग है और तीन पार्टियों का भागीदारी सरकार में बनी है। राहु/शुक्र/मंगल का जमावड़ा बना है। इधर राजद/जदयू/कांग्रेस का भी तीन दलों का जमावड़ा है। यहां वृहस्पति लग्न का स्वामी अर्थात श्री नीतीश कुमार, पार्टनर स्थानमें मंगल ग्रह यानि दबंग पर्सनलिटी यानि राजद एवं शुक्र नीच राशि का यानि बेचारा कांग्रेस ज्योतिषी नजर से आता है। फिर यहां राहु छुपकर या भ्रम पैदा करने का कार्य करेगा, जो अदृष्य रूप से इगो को बढ़ायेगा। साथ में राहु का रोल जो इन तीनों से दूर वे लोग यानि भाजपा एवं भाजपा के सहयोगी एवं साथ में रहने वाले कुछ अपने लोग षड़यंत्र कर सकते हैं। ज्योतिष प्रेमियों के लिए यह काफी रोचक एवं ज्योतिषीयों के लिए अध्ययन का विषय है।
द्वितीय काल का शपथग्रहण(24 नवम्बर,2005 दोपहर 12.34) में बने आघान कुंडली में पार्टनर स्थान में चंद्रमा का रहना एवं लग्न एवं राशि स्थिर राशि में रहने से साझीदार पर हावी होने का योग अच्छा बनता था। ये कारण रहा जो पूरा 5 वर्षाें की सरकार का परफोमेंस अच्छा रहा। तृतीय कालखंड जो 26 नवम्बर, 2010, दोपहर 3 बजे के शपथग्रहण समारोह की आघान कुंडली में साझीदार स्थान में शुक्र ग्रह की स्थिति भी साझेदार की सोच लग्नेश मंगल के दवाब में रहा जो मुख्यमंत्रीके प्रभाव को मजबूत ही बना रहा था। किंतु इस बार उसी स्थान में पाप ग्रहों का जमघट है। शुक्र ग्रह भी नीच राशि में राहु एवं मंगल के साथ स्थित होकर परिस्थियाॅं विपरीत कामों को ही अंजाम दे सकती है। सूर्य एवं शनि की युक्ति भी केन्द्र से असहयोग या षडयंत्र बिहार सरकार के विरूद्ध किया जा सकता है।
गोचर वृहस्पति एवं शनि भी विशेष मददगार नहीं दे रहा है, किंतु जनवरी 2016 से राहु/केतु का भ्रमण चंद्र राशि से लग्न एवं पार्टनर स्थान में होने से भी आपसी मतभेद भड़का सकता है। पर यह अस्थायी रहेगा। नवांश कुंडली मददगार है, किंतु कारकांश कुंडली के मददगार नहीं रहने से चिंता बढ़ायेगा।
चंद्र कुंडली से पार्टनर स्थान में वृहस्पति रहने से तीनों दलों में मानसिक सहयोग का प्रयास अवश्य सरहानीय रहेगा। आपसी समझ काफी कम्प्रोमाइजींग भी रहेगा। आपसी विचार भी उत्तम होगा। किंतु लग्नसे सप्तम स्थान पीडि़त होने से अचानक विपरीत परिस्थितियाॅं बन सकती हैं। अगस्त 2016 से जुलाई 2017 वृहस्पति में बललाव चिंता बढायेगा ही। लग्न से आंशिक मददगार भी है।
वहीं लग्नेश वृहस्पति ने आत्मकारक ग्रह होकर गजकेशरी योग बना दिया है जो बिहार के लिए अति उत्तम राजयोग बना रहा है। यद्यपि शनि की दृष्टि भी है फिर भी काफी विकास एवं समृद्धि लाने का कार्य 2017 से करेगा। 2016 तक राहु का प्रभाव विपरीत है। किंतु 2017 उत्तरार्द्ध से आत्मकारक एवं लग्नेश वृहस्पति की दशा प्रारम्भ होगी तो अति उत्तम प्रभाव दिखायेगा। सम्भवतः बिहारकी जायज मांग 2017 उत्तरार्द्ध पिछड़ा क्षेत्र घोषित कराने की बातें भी पूरी हो जाय। पर इसके लिए 2016 का पूरा समय काफी कोम्प्रोमाइज कर तीनों दलों को बिहार विकास के लिए प्रयास करना पड़ेगा।
नवमी तिथि अर्थात् रिक्ता तिथि एवं शतभिषा नक्षत्र(अल्पकालीन कार्यमें सफलता) में शपथ ग्रहण करना भी शुभ नहीं माना जाता है। यहां से भी मुहूर्त मजबूत नहीं है। शुभ ग्रहें चंद्रमा द्वादष में एवं वृहस्पति देवगुरू षष्ठ में होने से चाणक्य जैसे अध्यात्मिक एवं उत्तम जन नीति ज्ञान प्राप्त होना असम्भव जैसा रहेगा। बाढ़, भूकम्प तरह की घटनाओं से बचाने में मददगार नहीं है और न बिहार काफी तेजी के साथ ग्रोथ कर सकेगा । यह चाणक्य और चन्द्रगुप्त की धरती है। शक्ति और ज्ञान-अध्यात्म का मिश्रण करीब आधे विश्व पर सैकड़ों वषों तक राज किया। अब यहां के राजनेता स्वयं को चाणक्य एवं चंद्रगुप्त दोनों समझ लेते हैं, ये भारी भ्रम कहा जायेगा, क्योंकि चाणक्य के पास उच्च राजनीतिक गुण, अध्यात्मिक साधना एवं पूर्ण देशभक्ति सोच का श्रोत था जो अभी के राजनेताओं में दिखाई नहीं देता । चंद्रगुप्त एक अत्यन्त ही गरीब परिवार में पैदा लिया था उसे चाणक्य जैसा ब्राहमण ने ज्ञान एवं उचित शिक्षा देकर योद्धा बनाया। अतः बिहार में भी गरीब का बेटा ही पूर्ण राजपाठ कर सकता है, जो किसी अध्यात्मिक ज्ञान के ओतप्रोत गुरू के आधीन हो। राज्य का विकास हो सकता है पर मनुष्य को चाणक्य के बिना चेतना का विकास असम्भव है।



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